विजुअलाईजेशन अभ्यास
नीचे दी हुई तकनीक ''सौर केन्द्र तरंगें'' से आप अपने आप को एक शांत व शुद्घ अंतःकरण की ओर ले जा सकती है। आप इसमें ''हृदय व सौर केन्द्र संपर्क'' की तकनीक को जोड़कर, गहन श्वास के साथ इसका अपूर्व आनंद उठा सकते हैं।
- तैयार हो जायें ...
गहन श्वास तकनीक के समानः
- किसी भी शांत स्थान को चुनिये जहां पर आप सुरक्षित व आरामदायक महसूस करें।
- अपने आप को, ज़मीन पर सीधा लेटते हुए संपूर्ण रूप से तनावमुक्त रखें।
- अपनी आंखे बंद करें और उन्हे बंद ही रखें।
इस पूरे अभ्यास में, पूरे समय, गहरी सांस लेते रहें, प्रथम 5 सांसों तक नाक से सांस लें व मुंह से छोड़ें और बाकी समय में नाक से ही सांस लेकर नाक से छोड़ें।
- अपने शरीर को एकदम से सीधा रखें और मेरूदन्ड़, पीठ और सिर एक समान सीध में होना चाहिये।
- स्थिर हो जायें
गहन श्वास तकनीक के समानः
ये ध्यान रखें कि आपका पूरा शरीर तनावमुक्त हो और पेशियों में कोई गतिरोध न हो। अपने शरीर को तुरंत एक बार सिर से पैर तक महसूस करें।
- अपने सौर केन्द्र पर एकाग्रता बढ़ाएं। सौर केन्द्र आपकी उरेस्थि के नीचे व डायफ्राम से ऊपर है।.
अपने सौर केन्द्र पर ध्यान एकत्र करते हुए गहन श्वास लेना जारी रखें।
- धीरे धीरे आपको अपने सौर केन्द्र में ऊष्मा महसूस होगी।
सौर केन्द्र पर एकाग्र होते हुए वहां की ऊष्मा को बढ़ता हुआ महसूस करें।
अपने आप को अंतस्थ ही एकाग्र रखें और सौर केन्द्र की ऊष्मा को अनुभूत करें।
- अब सौर केन्द्र की ऊष्मा को शरीर के अन्य भागों में भेजना प्रारंभ करें।
इस ऊर्जा की तरंगों को किसी झील के शांत जल की हल्की लहरों के समान जानें।
महसूस करें कि ये ऊर्जा की तरंगे आपके पूरे शरीर में प्रवाहित हो रही हैं।
- तरंगे फैलती हैं और प्रसारित होती हैं तथा सारे शरीर को स्थिर करती है।
जैसे-जैसे ये तरंगे आगे जाती हैं, सारा तनाव अपने साथ ले जाती हैं।
अब इन तरंगों व इनकी ऊष्मा के साथ एकाकार होने का प्रयत्न करें।
शांत रहें
जब आप महसूस करें कि आप तैयार है, अपनी बांयीं ओर मुड़ें, घुटनों को मोड़ें। अपने बांए हाथ को अपने सिर के नीचे और दांए हाथ को ज़मीन पर अपने सामने रखें। भ्रूण में मौजूद शिशु के समान मुद्रा बनाएं। इस स्थिति में थोड़ा समय रहें।
धीरे-धीरे उठिये और अपनी आंखें बंद रखें।
कुछ सेकंड के बाद एक लंबी गहरी सांस के साथ अपनी आंखें खोलें।
और अपने-आप में मौजूद इस नवीन प्रकाश के साथ जागें।.