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आप इस संसार की कठोरता का सामना करते हैं। इसके चलते, ये आपकी कठोरता का सामना करती है।

हज़रत सलाहेद्‌दीन अली नादर अंघा द्वारा
मोवाजेने ®अभ्यास

These series are designed to increase energy and harmonize the body and its energy field. Also help with Blood circulation and joints flexibility preventing shin splints.

प्रारंभिक

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  • ज़मीन पर बैठकर अपने पैर सामने की ओर रखें। श्वसन के लिये सही स्थिती में आने के हेतु से, अपनी पीठ व कमर को जितना हो सके उतना सीधा रखें। लंबी व गहरी सांस लें।
  • आराम से निःश्वास करें व संपूर्ण शरीर को आराम दें। सीधे लेटते समय भी अपनी सीधी मुद्रा का ध्यान रखें। पैरों से लेकर सिर तक, अपने शरीर का निरीक्षण करें। ये सोचें कि शरीर में किसी प्रकार का कोई तनाव या रूकावट नही है। (यदि
  • आपको कहीं कोई रूकावट या तनाव लगता है, तब पुनः खडी मुद्रा में आकर अपने आप को तनाव रहित कर लें)
  • सांस अंदर लें और अपने बांए पैर को ऊपर उठाएं, इस दौरान घुटने को अपनी छाती की आर ले आएं।

  • इसी समय, इसी भावना के साथ, दोनो हाथो को बांए घुटने की ओर ले जाएं और बांए घुटने को सहारा देते रहें।
  • अपने बांए पैर को घुमाना शुरू करे, इसमें तीन बार सीधा व तीन बार उल्टा घुमाएं। (इस दौरान सांस सामान्य रखें)
  • सांस छोड़ें और अपने दोनो हाथ व पैर ज़मीन पर रख दें।
  • यही क्रिया दांए पैर के साथ करें।
मध्यम
  • सांस लें और इस बार,दोनो घुटनों को छाती की ओर लेकर आएं और दोनो हाथों से घुटनों को सहारा दें। दोनो घुटनों को एक एक हाथ से पकड़े रहें।
  • सांस छोड़ते हुएशरीर के निचले भाग को बांई ओर मोड़ें। अपनी पीठ को ज़मीन पर ही रखें॥ दूसरे शब्दों में, आपके शरीर के ऊपरी हिस्से ने ज़मीन के संपर्क में ही रहना चाहिये।
  • सांस लें और अपने घुटनों को पकडी हुई स्थिति में ही, मध्य में आएं।
  • इसी स्थिति को पुनः एक बार दांए भाग के साथ करें।
  • अब घुटनों को पकड़ी हुई स्थिति में ही, अपने हाथों को ज़मीन से उपर उठाएं और उन्हे घुटनों से जितना नज़दीक ला सकते हैं, लाईये।आप इस प्रकार की क्रिया के लिये अपने हाथों का सहारा घुटनों को भी देना चाहेंगे। इसे कुछ क्षण तक बनाएं रखें जिससे आपके मेरूदन्ड में काफी सही खिंचाव आ सकेगा।
विकसित:
  • सांस छोड़ें और अपने दोनो पंजों को ऊपर उठाएं जिससे वे छत की ओर हो। अपने हाथों की मदद से शरीर को थामे रहें। धीरे धीरे अपने सिर को ज़मीन की ओर ले आएं।
  • अपने शरीर के निचले भाग में सही खिंचाव महसूस करें।
  • सांस लें और दोनो पैरों को मोड़े लेकिन पिछले भाग से घुटने की पकड़ ना छोड़ें और पुनः सामान्य बैठक व्यवस्था हेतु तैयार रहें।
  • एक बार के अभ्यास और एक बार सांस छोड़ने पर, अपने-आप को पुनः सामान्य बैठने की स्थिति में ले आएं।
  • लाभः
    • सारे शरीर का संतुलन होता है। मेरूदन्ड को अभ्यास व ऊर्जा मिलती है। शारीरिक अंगों में परस्पर सामंजस्य बनता है। छाती व पेट का अभ्यास होता है।