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'आपके हृदय में रक्त है। वहां और क्या हो सकता है? उसके भीतर क्या है? वहां सब कुछ है, जब एक बार आप सोच लेते हैं कि वहां पर कुछ नही है।''

हज़रत सलाहेद्‌दीन अली नादर अंघा द्वारा
शरीर और मस्तिष्क का तनावमुक्त होना
'हृदय व सौर ऊर्जा के एकात्म'' संबंध को महसूस कीजिये जिसे नीचे दिया गया है और इसके बाद आप नवीन स्फूर्ति से भरे हुए महसूस करेंगे।
तैयार हो जाईये...
  • आरामदायक वस्त्र पहनिये और अपने शरीर को ढ़ंककर रखिये जिससे वो गरम रह सके।
  • कोई शांत स्थान खोजिये जहां पर आप सुरक्षित व आरामदायक स्थिती में रह सकें।
  • अपने आप को आरामदायक स्थिति में, अपने घुटनों को जमीन पर रखकर बैठिये
  • अधिक एकाग्रता के लिये आप अपनी आंखे बंद कर सकते हैं। इस संपूर्ण अभ्यास के दौरान, श्वसन को गहरा रखिये, धीमा व कोमल, अपनी नाक से सांस लेते हुए और मुख से छोड़ते हुए। अपने शरीर को इस तरीके से रखिये कि मेरूदन्ड सीधा रह सके और आपकी गर्दन व सिर उसकी सीध में रहे।
  • ध्यान रखें कि आपका पूरा शरीर शांत हो और किसी भी पेशी में किसी प्रकार का तनाव नही हो। इसके लिये अपने शरीर को पंजो से सिर तक निरीक्षण कीजिये ।
  • सबसे पहले अपने पंजों की ओर ध्यान दीजिये। सबसे पहले अपने दांए पैर और फिर बांए पैर में इस प्रकार की अनुभूति को महसूस कीजिये। क्या आप अपने पैरों के तलवों को महसूस कर सकते हैं? उसकी बनावट को महसूस कर सकते हैं? अपने पैरों को तनावमुक्त कीजिये और उन्हे ज़मीन पर आराम से रखिये।
  • अब अपना ध्यान अपनी पिंडलियों पर लगाईये। क्या आप वहां पर स्थित अपनी पेशियों को महसूस कर सकते हैं? क्या वे आराम का अनुभव कर रही हैं? अपने दांए पैर को धीरे से उठाईये और धीमे से ज़मीन पर फिर से रख दीजिये।
  • यही क्रिया अपने बांए पैर के साथ कीजिये
  • अब अपना ध्यान अपनी दांई जंघा पर ले जाईये। वहां पर स्थित मांसपेशियों को महसूस कीजिये। वे कैसी अनुभूति देत हैं? उन्हे ढीला छोड़ दीजिये और वापिस पहले वाली मुद्रा में आ जाईये।
  • अपनी बांई जंघा के साथ भी ऐसा ही कीजिये। अपने दोनों पैरों को ज़मीन पर रखिये
  • अब अपनी कमर के पिछले हिस्से पर ध्यान दीजिये। यदि इस भाग में किसी भी प्रकार का तनाव महसूस होता है, तो उसे ढीला छोडिये। अपने शरीर को ज़मीन पर ढीला छोड दीजिये।. अब अपने पेट की ओर ध्यान दीजिये। वहां भी यदि पेशियों में तनाव है, तो उसे ढीला छोड दीजिये। अब अपना ध्यान पीठ के ऊपरी हिस्से में लाएं। इन पेशियों को एक के बाद एक महसूस करना शुरू करें और अपने कंधे तक आएं। यहां पर इन्हे ढीला छेडिये और वापिस आराम की स्थिती में आएं।
  • अपने कंधों को महसूस करें। उन्हे हल्के से हिलाकर वापिस ज़मीन पर आराम से रखें।
  • अपनी भुुजाओं पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। अपनी बांई भुजा और ऊपरी पेशियों को महसूस करें। फिर निचली पेशियों को। इसके बाद उन्हे तनाव मुक्त स्थिती में ज़मीन पर रख दें।
  • अब आपके दांए हाथ की ऊंगलियां, एक के बाद एक उन्हें देखें और तनावमुक्त करते जाएं। यही क्रिया अब अपने बांई भुजा व हाथ की ऊंगलियों के साथ करें।
Settle down, it is your space:
  • अब धीरे से अपने सिर को ज़मीन से उठाईये और उसे तनाव रहित करते हुए, अपनी गर्दन को ढीला छोड़िये और इसे पुनः अपने स्थान पर लाकर ज़मीन पर रखिये। अपने शरीर का पूरा भार ज़मीन पर रखिये। लंबी गहरी सांस लेना जारी रखिये।
  • सांस अंदर लेते समय अपने दोनो हाथों को ऊपर उठाकर सिर की सीध में रखिये, पैरों को सीधा रखिये, अपने पंजों में खिंचाव दीजिये। अपनी भुजाओं को ज़मीन पर, सिर के बाजू में रखिये। अपनी सांस को कुछ समय तक रोकिये। अब सांस छोड़ते समय, अपने पैर और पंजों को तनावरहित रखिये और दोनों हाथों को ऊपर, सिर की दिशा में सीधे और उसके बाद सिर के बगल में आराम की स्थिति में लाकर रखिये। अब अपनी आंखों को बंद कीजिये।
  • अपना पूरा ध्यान सांस की ओर लगाईये और वायु के प्रवाह को प्रत्येक सांस के साथ महसूस कीजिये। अब अपने बांए हाथ को अपने हृदय पर रखिये और दांए हाथ को अपने सौर जालिका पर। हृदय आपकी छाती के मध्य में है, थोड़ा सा बांए। सौर जालिका, दांई ओर उरोस्थि से नीचे और डायफ्राम से ऊपर स्थित है। अपने हाथ औरभुजाओं को आरामदायक स्थिती में रखिये जिससे उनमें किसी प्रकार का तनाव न रहे। अपने हाथों पर दबाव मत डालिये, बस हौले से अपने हृदय की गति को सुनते रहिये।
  • आपका बाकी का शरीर पूर्णतः तनावरहित व ढीला है।
  • लंबी व गहरी सांस लेते रहिये जिससे आपकी पसलियों के ढांचे के उठने गिरने का एहसास आपको होता रहे।
  • अपनी छाती में, हृदय के स्पन्दन को महसूस करना शुरू कर दीजिये। उन्हे सुनिये . . ..
  • अब अपनी पसलियों के पिंजरे की हलचल को महसूस कीजिये, हृदय की धड़कनों को सुनिये। उस शांत व आनंदमय अनुभूति को अपने ऊपर हावी हो जाने दीजिये।
  • धीरे धीरे अपनी दांई हथेली के क्षेत्र को अनुभूत कीजिये। इसके साथ ही हृदय की धड़कन पर अपना पूरा ध्यान रखिये जो कि आपकी हथेली के नीचे है. Remember serenity and sooth your mind.
  • निरंतर लंबी गररी सांस लेकर इस आनंद का अनुभव करते रहिये।
  • धीरे से अपने हाथों को अपने आस पास रख लीजिये और अपनी सांस पर व वायु के आवागमन पर अपना ध्यान केन्द्रित रखिये।
  • अपनी सांस की आवाज पर ध्यान दीजिये
  • जब आपको लगे कि आप तैयार हैं, अपनी बांई ओर करवट लें, घुटनों को मोड़ें, अपने बांए हाथ को सिर के नीचे रखकर जमीन पर रखें। एक भ्रूण के शिशु की भांति मुद्रा लें। अपनी आंखें बंद रखें। इस स्थिति में थोड़ा समय रहें।
  • अपनी पसलियों के ढ़ांचे में से होकर जाने वाली हवा को महसूस कीजिये, प्रत्येक बार सांस अम्दर लेते समय और छोड़ते समय
  • धीरे-धीरे उठने की प्रक्रिया प्रारंभ करें। इस दौरान आंखें बद रखें।
  • कुछ सेकंड के बाद, धीरे से अपनी आंखें खोलिये, एक लंबी सांस लीजिये और चेहरे पर प्रसन्न मुस्कान ले आईये। अब देखिये कि आप कितने ताज़ा और प्रसन्न हो गए हैं।