'आपका आलसी रवैया आपको अपने ज्ञान से दूर ले आता है जिससे आप उन आदतों का अनुसरण करना शुरू कर देते हैं जिन्हे आपने कभी भी बनाना नही चाहा था।''
हज़रत सलाहेद्दीन अली नादर अंघा द्वारा
श्वसन अभ्यास तमरकोज़ श्वसन तकनीक ‘परवाज़’ (उडान) का अभ्यास करें और खुद को एक अलग मुकाम पर ले जायें...:
तैयार हो जायें ...
आरामदायक कपड़े पहनें
ऐसा स्थान चुनें जहां पर शुद्घ वायु हो। अपने पैर व कंधों को स्थिर व सीधा रखें।
अपनी रीढ को सीधा रखें व ठोडी को आगे की ओर व सिर को सही स्थिति में
अपने हाथों को शरीर के बाजू में तनावमुक्त स्थिति में रखें
एक लंबी गहरी सांस लें और पूरी तरह से छोड़े
सीधे खड़े होने के बाद अपने शरीर का निरीक्षण करेंᅠऔर देखें कि आपने अपने शरीर को तनावरहित तरीके से अपने ऊपर ले रखा है- अपने पंजों से होते हुए सिर तक इस निरीक्षण को जारी रखें। किसी भी प्रकार का तनाव इस अभ्यास में नही होना चाहिये।
आपका श्वसन सामान्य से धीमा व मृदु होना चाहिये.आपको अपने श्वसन पर पूरा सरल नियंत्रण रखना चाहिये।
आप पेशियों को मोड़ते हैं परंतु उसमें कहीं भी तनाव नही होता।,
पूरे समय में आपका पूरा ध्यान अपने शरीर की मुद्राओं और श्वास की गहराई पर जाता है।
शुरू करें
धीमे और गहरे श्वास लेना शुरू करें। इसी के साथ अपने-आप को अपने पैरों पर से ऊपर उठाते हुए, शरीर की पेशियों को खिंचाव दें।
सांस को अंदर लेते हुए अपने हाथों को भी ऊपर की ओर ले जाएं और सिर के ऊपर जाकर स्थिर करें। अब आपकी भुजाएं आपके कानो से सटी हुई, एक-दूसरे के समानांतर ऊपर की ओर खिंची हुई हैं।
आपका पूरा शरीर सही तरीके से तना हुआ है और आपने सांस अंदर की ओर भरी हुई है।
अपनी सांस को थोड़े समय के लिये रोकें और ये देखें कि आपकी सारी पेशियां खिंची हुई न होकर तनी हुई हैं।
अपनी गर्दन, कंधे और सिर को तनावरहित स्थिति में रखें।
अब धीरे-धीरे सांस छोड़ना शुरू करें और इसके साथ अपने हाथों को भी नीचे लाते हुए उन्हे झुकाएं और अपने पैरों को स्पर्श करें।
Breathing will be through the nose.
अब आपने सांस पूरी छोड़ दी है। इस स्थिति में थोड़ा समय रहें।