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"वह साधक जो आत्मानुशासन की विविध स्थितियों से होकर गुजरता है, शुद्घता के चरणों को पार करता है, उसे उस अनजाने तथ्य का रहस्योद्‌घाटन होता है, उसी को ज्ञान के द्वारा उच्चावस्था प्राप्त होती है और वह ईश्वर के साथ एकाकार हो सकता है।"

शास्त्र ''मैं''
हज़रत सलाहेद्‌दीन अली नादर अंघा द्वारा
तमरकोज़
तमरकोज़ एक आत्मिक यात्रा है। ये उन सभी के लिये है जो अपनी आंतरिक क्षमताओं को पुनः एकाकार करना चाहते हैं और इसके द्वारा अपने जीवन का उद्‌देश पाना चाहते हैं।

तमरकोज़ एक सूफी कला है और आत्मज्ञान का विज्ञान है जिसमें एकाग्रता व ध्यान का समावेश है। ये स्वास्थ्य, आनंद, संपूर्णता, सौन्दर्य व अनुशासन को जीवन में वापिस पाने का तरीका है।
तमरकोज़ मानव जीवन की समस्त आवश्यकताओं को पूरा करता है फिर वे शारीरिक हो, संवेदनात्मक हो, मानसिक हो या आध्यात्मिक। ये प्रत्येक व्यक्ति की मदद करता है जिससे वो अपने आत्म साम्राज्य में पहुंच सके.ये आत्मिक व शक्तिशाली प्रक्रिया 1400 वर्ष पुराने इस्लामी सूफीवाद में अपनी जड़ें रखती है।
तमरकोज़, एमटीओ शाहमकसुदी का विशेष कार्यक्रम है और आज यह सभी के लिये उपलब्ध है, अपने वर्तमान स्वरूप में, उसके वर्तमान सूफी गुरू द्वारा, श्रद्घेय हज़रत सलाहेद्‌दीन अली नादर अंघा


तमरकोज़ कैसे काम करता है?
।तमरकोज हमारे शरीर में ही निर्मित विद्युतचुंबकीय केन्द्रों की मदद से कार्य करता है। ये विद्युत चुंबकीय केन्द्र हमारी आंतरिक ऊर्जा से ही बने होते हैं।हमारे ऊर्जा केन्द्र सक्रिय होते हैं, और उनके क्षेत्र अनुशासित व एकात्म हो जाते हैं। इस प्रक्रिया से शरीर की एकाग्रता, मस्तिष्क व आत्मा में एकात्म संपन्न होकर सभी के साथ प्रेम से रहने के अलावा शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।

तमरकोज अकेली ऐसी अभ्यास प्रक्रिया है जो हमारे शरीर व मस्तिष्क का एकीकरण करती है और बस यही एक तंत्र है जो सक्रिय रूप से निम्न तत्वों को प्रभावित करता हैः
  • शारीरिक लोच
  • मुद्रा अभ्यास
  • सही श्वसन
  • मानसिक सकेन्द्रण
  • शक्तियों की एकाग्रता
  • मानसिक शांति
  • हृदय से ध्यान
  • स्वस्थ व संतुलित भोजन
  • सकारात्मक सेच
  • शांति
इस प्रक्रिया से आनंद और संपूर्णता का विकास होता है, हमारा शरीर जागरण बढ़ता है, हमारा मस्तिष्क व संवेदनात्मक स्तर सुधरकर हमें बाहरी तनावों से मुक्ति मिल जाती है।